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Full text of "Haryana Gazette, 1985-03-22, No. 18"

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HARYANA GOVT GAZ ., APRIL 30 , 1985 ( VYSK 10 , 1907 SAKA) 


( PART 1 


स ओ.वि./ फरीक्षा द/ 17--35/ 11354.-- चूंकि हरियाणा राज्यपाल की राय है कि मै. श्री . के . स्ट्री :, प्लाट 
नं . 12 संपटर.. , फरीदाबाद केभिन श्री प्रेम सिंः तथा उसके प्रबन्धक्षों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले में 

होगिक वाद ; 


पार कि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेत निर्दिष्ट करना बांछनीय समझते हैं ; 


इस लिये, प्रबोगिक विवाद अधिनियम, 1947, की धारा 10 को उपधारा ( 1 ) खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
तयों का प्रयोग करते हुये, हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं . 5415-3 - अभ -68/ 1 5 254, दिनांक 20 
जून , 1968ो साथ पढ़ते ये अधिसचना सं. 11495 - जी . श्रम 88-श्रम 57/11245,दिनांक 7 फरवरी , 1958 द्वारा उक्त अधिनियम की 
पारा 7 प्रधान गठिा म न्यायालय, फरीदाबाद को विवादग्रस्त या उससे सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिपा मामला न्यायनिर्णय के 
नियनिर्विीट करते हैं, ओ कि उक्त प्रवन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत अथवा सम्बन्धित 
मामना : 

क्या श्री प्रेम सिंह की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि महीं , तो वह किस राहत का हकदार है ? 


दिनांक 22 मार्च, 1985 


सं . प्रो.वि. फरीदादाद/ 222-84/ 18656. - चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै . एसोमिटि रिफे ट्री गांच 
ममर ,फरीदाबाद के श्रमिः: श्री रमई राम तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले में कोई प्रौद्योगिक 


और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिये, अब, औधोगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के ब E ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं. 5415 - " - श्रम 68/1525 4, दिनांक 20 
न , 1968, के साप पड़ते हुए अधिसूचना सं. 11495 - जी - श्रम88- श्रम/ 57/11245, दिनांक 7 फरवरी , 1958, द्वारा उक्त 
अधिनियम धारा 7 मधीन गठित श्रम न्यायालय , फरीदाबाद, को विवादग्रस्त या उसके सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिया 
मामा न्यायनिर्णयकानिदिष्ट करते हैं , जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या पिदाद से 
सुसंगत प्रया 

सम्बन्धित मामला है 


7 


या श्री रमई र " की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 

सं . प्रो . वि . /फरीदाबाद/ 222-8-111663.---चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मैं . एसोसिएटिड रिफैक्ट्री 
ITH ! म सर फरीदाबाद के अमिक राम लाल तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिधित मामले में कोई प्रौद्योगिक 
विवाद : 

और नि. हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना यांछनीय समझते हैं ; 

इस लिये, अब , प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) सण ( ग ) द्वारा प्रदान की गई शक्तियों 
vit प्रयोग करते हुये हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी मधिसधना सं. 5415--3- श्रम/ 68/ 15 254, दिनांक 20 जून , 1968 
के साथ पढ़ते हुये अधिसूचना सं. 11495 - ली - श्रम 88 - श्रम/ 57/112 15, दिनांक 7 फरवरी, 1958 द्वारा सक्त अधिनियम की धारा 

अधीन गठित श्रम न्यायालय , फरीदाबाद को विवादास्त या उससे सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिखा मामलान्याय 
के लिये निर्दिष्ट करते है, भो कि त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत प्रपदा 
सम्बन्धित मामला है : 

त्या श्री राम ाल की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं , तो यह किस राहत का हकदार है ? 

सं. मो . पि . फरीदाबाद/ 222-84/ 11670.-- चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै. एसोमिएटिड रिफैचरीस, 
माय मसर, फरीदाबाद, के श्रमिक भिव नाथ तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले में कोई मौधोगि : 
विवाद है । 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्भय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते है , 

" सलिये , अब , प्रौधोगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के पर : ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
सियों का प्रयोग करते हये हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं. 5415-3 - श्रम 68/15254, दिनांक 20 


- 


PART 1 


HARYANA GOVT GAZ., APRIL 30, 1985 (VYSK . 10, 1907 SAKA) 


1195 


जून , 1968 के साथ पढ़ते हुये अधिसूचना सं ० 11495 - जी - श्रम/ 88-श्रम / 57/ 11245, दिनांक 7 फरवरी, 1958द्वारा उक्त अधिनियम 
की धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , फरीदाबाद को विवादग्रस्त या उससे सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिखा मामला न्याय 
निर्णय के लिये निर्दिष्ट करते हैं , जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत अथवा 
सम्बन्धित मामला है : 

क्या श्री शिव नाथ की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं, तो वह किस राहत का हकदार है ? 


दिनांक 25 मार्च 1985 


सं ० प्रो ० वि ०/ अम्बाला/ 3-83 / 1 2129.-- चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै ० नियन्त्रक मुद्रण तया लेखन 
सामग्री हरियाणा, चन्डागढ़, हरियाणा गर्वमेंट प्रिटिंग प्रेस पंचकुला, (जिला अम्बाला ) के श्रमिक श्री जोगा राम तथा उसके प्रबन्धकों के 
मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले में कोई प्रौद्योगिक विवाद है ; 


और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 


इसलिये , अब, औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई शक्तियों 
का प्रयोग करते हुए, हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं . 3{ 44 ) 84-3- श्रम, दिनांक 18 अप्रैल , 1984 
द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , अम्बाला को विवादग्रस्त या उससे संबंधित नीचे लिखा मामला 
न्यायनिर्णय के लिए निर्दिष्ट करते हैं , जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या नो विवाद ग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत 
अथवा संबंधित मामला है ; 


क्या श्री जोगा राम की सेवामों का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं , तो वह किस गहत का हकदार है ? 


दिनांक 8 अप्रैल 1985 


. 


सं ० ओ ० वि ०/पानीपत/18-85/ 14700.-- चूंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै ० पंकज वूलन मिल , पानीपत , 
( नजदीक प्रेम मन्दिर ) के श्रमिक श्री राज पाल तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमें इसके बाद लिखित मामले में कोई प्रौद्योगिक 


विवाद है ; 


और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 

इसलिये, प्रब, प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 की धारा 10 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई शक्तियों 
का प्रयोग करते हुए , हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा सरकारी अधिसूचना सं 0 3( 44) - 84-3- श्रम, दिनांक 18 अप्रैल, 1981 द्वारा 
उक्त अधिनियम की धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , अम्बाला को विवादग्रस्त या उससे संबन्धित नीचेलिखा मामला न्यायनिर्णय 
के लिए निर्दिष्ट करते है जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसगत अथवा संवन्धित 
मामला है 

क्या श्री राज पाल की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं तो वह किस राहत का हकदार है ? 

सं ० प्रो ० वि ०/फरीदाबाद / 5 ! -85, ! 4705. - चंकि हरियाणा के राज्यपाल की राय है कि मै ० बाटा इण्डिया 
लि . एन ० आई ० टी ० फरीदाबाद के श्रमिक श्री मुरारी लाल तथा उसके प्रबन्धकों के मध्य इसमे इसके बाद लिखित मामले मे कोई 
प्रौद्योगिक विवाद है । 

और चूंकि हरियाणा के राज्यपाल विवाद को न्यायनिर्णय हेतु निर्दिष्ट करना वांछनीय समझते हैं ; 


दिनांक 20 


इसलिये, अत्र, प्रौद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947, को धारा 10 को उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) द्वारा प्रदान की गई 
शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल इसके द्वारा मरकारी अधिसूचना सं ० 541 5-3- श्रम ..8 / 15254, 
जून , 1968, के साथ पढ़ते हुए अधिसूचना सं • 11495- जी - श्रम88- श्रम/ 5711245, दिनांक 7 फरवरी, 1958. द्वारा उक्त अधिनियम 
की धारा 7 के अधीन गठित श्रम न्यायालय , फरीदाबाद, को विवादग्रस्त या उसके सुसंगत या उससे सम्बन्धित नीचे लिखा मामला 
न्यायनिर्णय के लिये निर्दिष्ट करते हैं , जो कि उक्त प्रबन्धकों तथा श्रमिक के बीच या तो विवादग्रस्त मामला है या विवाद से सुसंगत 
अथवा सम्बन्धित मामला है: -- 

क्या श्री मुरारी लाल की सेवाओं का समापन न्यायोचित तथा ठीक है ? यदि नहीं , तो वह किस राहत का हकदार है ?